झारखण्ड की जनजातियां-Jharkhand ki Janjatiya

झारखण्ड की जनजातियां

झारखण्ड में कुल 32 जनजातियां निवास करते हैं। जिनमे से से 24 जनजातियां प्रमुख है और 8 जनजातियां को आदिम श्रेणी में रखा गया है।

संथाल जनजाति

  • जनसँख्या के दृष्टि से संथाल जनजाति झारखंड की सबसे बड़ी जनजाति है।
  • यह भारत की तीसरी सबसे अधिक जनसँख्या वाला  जनजाती है।
  • इससे प्रजातिया दृष्टि से प्रोटो एस्ट्रोलाएड में रखा जाता है।
  • संथाल जनजाति के भाषा संथाली और लिपि ओलचिकी है।
  • लुगु बुरु को संथालों का संस्थापक पिता माना जाता है।
  • कृषि इनका जीविका का मुख्य आधार है।
  • संथाल परगना ,हजारीबाग ,चतरा ,रांची ,बोकारो ,गिरिडीह ,पलामू अदि जिला संथालों का निवास स्थल है।
  • राजमहल पहाड़ी क्षेत्र में इनके निवास स्थल को ‘दामिन-ए-कोह ‘ कहा जाता है।
  • संथाली भाषा को 2004 में सविधान के 8 आठबी अनुसूचि में शामिल किया  गया।
  • संथालों का प्रमुख त्योहार -एरोक ,हरियाड ,जापाड़ ,सोहराई ,सकरात ,भगा सिम ,बाहा  और बांधना।
  • जादोपटिया संथालों चित्रकला सैली है।

उरांव जनजाति 

  • उरांव छोटानागपुर पठार की एक महत्वपूर्ण द्रविड़ जनजाति  है।
  • उरांव खुद को ‘कुडुख‘ कहते हैं और उनका भाषा भी “कुडुख” है। कुडुख का अर्थ मनुश्य है।
  • यह झारखंड की दूसरी तथा भारत की चौथी सर्वाधिक जनसँख्या वाली जनजाति है।
  • यह झारखंड की कुल जनसँख्या का 18.14 प्रतिशत हैं।
  • प्रमुख गोत्र – किस्पोट्टा , टोप्पो ,एक्का ,मिंज अदि प्रमुख है।
  • उरांव जनजाति समगोत्रीय विवाह मना है।
  • उरांव जनजाति में युवागृह को घुमकुरिया कहा जाता है।
  • उरांव गांव का मुखिया ‘महतो‘ कहलाता है।
  • उरांव जनजाति के पंचायत ‘पंचोरा‘ कहा जाताा है।
  • इनके प्रमुख देवता “धर्मेश” है।
  • उरांव जनजाति के पहाड़ देवता – मरंगबरु 
  • उरांव जनजाति के ग्राम देवता – ठाकुर देव 
  • उरांव जनजाति के सीमांत देवता – डिहवार 
  • उरांव जनजाति के कुल देवता – पूर्व  जात्मा 
  • उरांव गांव का धार्मिक प्रधान पाहन होता है।
  • पुजार पाहन का सहयोगी होता है।
  • उरांव के मुख्य पूजा स्थल सरना होता है।
  • शासन उरांव के पूर्वजों के आत्मा का निवास स्थल होता है।
  • करमा ,सरहुल ,खद्दी ,जतरा ,चाँदी ,फागु अदि उरांव के प्रमुख त्यौहार है।
  • जदूर उरांव जनजाति का प्रमुख नृत्य है। इस नृत्य को नीर- सुसंको भी कहा जाता हैै।

मुंडा जनजाति

  • मुंडा जनजाति प्रमुख रूप से झारखंड के छोटानागपुर क्षेत्र में निवास करते हैं।
  • इस जनजाति की अपनी भाषा मुंडारी है ,जो  आस्ट्रो-एशियाटिक परिवार का एक प्रमुख भाषा हे।
  • मुंडा अपनी भाषा को होडो जगर कहते हैं।
  • इस  जनजाति में गोत्र को “किलि” कहा जाता है।
  • मुंडा झारखंड का तीसरी(14.56 %) सावधीक जनसंख्या वाली जनजाति है।
  •  इस जनजाति को कोल के नाम से भी जाना जाता है।
  • सरना – मुंडाओं के ग्राम देवता का निवास स्थान है।
  • शासन – मुंडाओं के समाधी स्थल है।
  • इनमे बहुविवाह प्रथा प्रचलित है।
  • मुंडा जनजाति में तलाक को साकामचरि कहा जाता है।
  • सहरुल ,करम,सोहराई ,मांगे और फागु मुंडाओं प्रमुख त्योहार है।

हो जनजाति 

  • यह  झारखण्ड की चौथी सर्वाधिक जनसंख्या वाला जनजाति है।
  • हो जनजाति प्रोटो एस्ट्रोलाएड प्रजाति समूह से सम्बंधित हैं।
  • इस जनजाति के भाषा ‘हो’ है। जिसका लपि वारंग क्षिति है।
  • इनमे समगोत्रीय विवाह बर्जित है।
  • सिंगबोंगा हो जनजाति के प्रमुख देवता हैं।
  • पाहुईबोंगा – ग्राम देवता
  • ओरि बोड़ाम – पृत्वी देवता
  • मोरंगबुरु – पहाड़ देवता
  • दिशाओली बोंगा – वर्षा देवता
  • माघे ,होरो ,बताओली अदि हो जनजाति के प्रमुख त्यौहार है।

खरवार जनजाति 

  • खरवार जनजारी झारखण्ड की पांचवी सबसे अधिक जनसंख्या वाली जनजाती है।
  • यह मुख्य रूप से पलामू और लातेहार जिले में निवास करते हैं।
  • यह स्वयं को सूर्य वंशी राजपूत कहते हैं।
  •  इनका संबंध द्रविड़ प्रजाति से है।
  • इनकी भाषा खरवारी है।
  • इस जनजाति में बाल विवाह ,विधवा विवाह अदि प्रथा प्रचलित है। इनके विवाह ब्राह्मण के सहायता से की जाती है।
  • सहरुल ,करमा ,रामनवमी ,दशहरा अदि इनके प्रमुख पर्व है।
  • सिंगबोंगा इनके प्रमुख देवता हैं।

असुर जनजाति 

  • यह सबसे प्राचीन जनजाति है।
  • इनके हड़प्पा तथा मोहनजोदड़ो से सम्बंधित माना जाता हे।
  • असुर जनजाति प्रोटो-आस्ट्रेलाइड समूह के अंतर्गत आती है।
  • ‘सिंगबोंगा’ उनके प्रमुख देवता है।
  • सड़सी  और कुटासी  इनका प्रमुख पर्व है, जिसमें यह अपने औजारों और लोहे गलाने वाली भट्टियों की पूजा करते हैं।

बिरहोर जनजाति 

  • यह जनजाति प्रमुख रूप से झारखण्ड में निवास करते हैं।
  • इनकी भाषा बिरहोरी है।
  • बिरहोर का अर्थ जंगल का आदमी होता है।
  • हजारीबाग ,चतरा ,रांची ,बोकारो ,धनबाद ,गिरिडीह ,गुमला ,लातेहार  अदि क्षेत्र में बिरहोर जनजाति निवास करते हैं।

झारखण्ड की जनजाति से सम्बंधित प्रश्न 

  1. झारखण्ड में कुल कितने अनुसूचित जनजातियां है ? – 32
  2. जहसंख्या की दृष्टि से किस जनजाति सबसे अधिक हैं ? – संथाल
  3. कीरिंग बापला किस जनजाति से सम्बंधित है ? – संथाल
  4. धामकुड़िआ किस जनजाति से सम्बंधित है ? – उरांव
  5. कुड़ुख का अर्थ क्या है ? – मानव
  6. ऋग्वेद में किस जनजाति का उल्लेख मिलता है ? – असुर जनजाति
  7. मुंडा जनजाति का युवागृह क्या है ? – गीतिऔरा
  8. किस जनजाति को शिकारी के रूप में जाना जाता है ? – कोरबा
  9. टांडा किस जनजाति का युवागृह है ? – बिरहोर
  10. गोंड जनजाति में संयुक्त परिवार को क्या कहा जाता है ? – भाई बन्द

सबंधित लेख 

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धन्यवाद
आप का दिन सुभ हो।

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