राजस्थान के राष्ट्रीय उद्यान

हेलो दोस्तों आज के इस पोस्ट में हम क्षेत्रफल के आधार पर भारत का सबसे बड़ा राज्य राजस्थान के प्रमुख राष्ट्रीय उद्यानों के बारे में जानकारी देंगे।रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान, सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान  , मुकंदरा बाघ अभयारण्य , केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान , मरुभूमि राष्ट्रीय उद्यान , कुम्भलगढ़ वन्यजीव अभ्यारण्य अदि राजस्थान के प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान है।

राजस्थान के प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान

रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान : रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान भारत के राजस्थान राज्य के सवाई माधोपुर जिले में स्थित एक राष्ट्रीय उद्यान है।1,334 वर्ग किलोमीटर फैला हुआ यह राष्ट्रीय उद्यान अपने रॉयल बंगाल बाघों के लिए प्रसिद्ध है, जो भारत में बाघों की सबसे बड़ी आबादी का घर है।रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान में अन्य वन्यजीवों में तेंदुए, हिरण, बारहसिंगा, चिंकारा, जंगली सुअर, लोमड़ी, भेड़िया, सियार, खरगोश, गिलहरी जैसे और कई अन्य वन्यजीव पाए जाते हैं। उद्यान में पक्षियों की भी एक विविध श्रृंखला है, जिसमें सारस, मोर, बतख, बटेर, कबूतर, तोता और कई अन्य पक्षी शामिल हैं।

सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान : सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान राजस्थान के अलवर जिले में स्थित । सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान अपने बाघों के लिए प्रसिद्ध है, जो एक समय में विलुप्त हो गए थे। हालांकि, 1973 में, रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान से 20 बाघों को सरिस्का में स्थानांतरित किया गया था, और अब सरिस्का में एक स्वस्थ बाघ आबादी है। सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान में अन्य वन्यजीवों में तेंदुए, हिरण, बारहसिंगा, चिंकारा, जंगली सुअर, लोमड़ी, भेड़िया, सियार, खरगोश, गिलहरी शामिल हैं। उद्यान में पक्षियों की भी एक विविध श्रृंखला है, जिसमें सारस, मोर, बतख, बटेर, और कई अन्य शामिल हैं।

मुकंदरा बाघ अभयारण्य : मुकंदरा बाघ अभयारण्य भारत के सबसे महत्वपूर्ण बाघ आवासों में से एक है। 2023 में, अभयारण्य में 29 बाघों की संख्या दर्ज की गई थी, जो इसे भारत में बाघों की संख्या के मामले में 12वें स्थान पर रखता है। मुकुंदरा बाघ अभयारण्य भारत के राजस्थान में कोटा शहर से लगभग 40 किलोमीटर दूर है। यह 1957 में एक अभयारण्य के रूप में स्थापित किया गया था और 1973 में प्रोजेक्ट टाइगर के तहत एक बाघ अभयारण्य घोषित किया गया था।

केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान : केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान को 1985 में यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल के रूप में सूचीबद्ध किया गया था। यह उद्यान भारत के सबसे लोकप्रिय पक्षी विहारों में से एक है।केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में 365 से अधिक पक्षी प्रजातियाँ पाई जाती हैं। इनमें से कई प्रजातियाँ दुर्लभ और संकटग्रस्त हैं, जैसे कि साइबेरियाई क्रेन, यूरेशियन सारस, और काले गर्दन वाला सारस। सर्दियों के दौरान, हजारों पक्षी इस उद्यान में प्रवास करते हैं, और यह एक प्रमुख पक्षिओं का निवास का स्थल बन जाता है।

मरुभूमि राष्ट्रीय उद्यान : मरुभूमि राष्ट्रीय उद्यान की स्थापना 1980 में की गई थी। मरुभूमि राष्ट्रीय उद्यान भारत के राजस्थान राज्य के जैसलमेर जिले में स्थित है।यह दुनिया का सबसे बड़ा रेगिस्तानी राष्ट्रीय उद्यान है। उद्यान में विभिन्न प्रकार के रेगिस्तानी वनस्पति और जीव हैं, जिनमें ऊंट, गीदड़, लोमड़ी, जंगली बिल्ली, और अन्य छोटे स्तनधारी पाए जाते हैं।

कुम्भलगढ़ वन्यजीव अभ्यारण्य : कुम्भलगढ़ वन्यजीव अभ्यारण्य भारत के राजस्थान राज्य में उदयपुर और पाली ज़िलों पर फैला हुआ है। कुम्भलगढ़ वन्यजीव अभ्यारण्य अपनी जैव विविधता के लिए जाना जाता है।यहां विभिन्न प्रकार के जानवर और पक्षी पाए जाते हैं। कुछ प्रमुख जानवरों में तेंदुए, भालू, भेड़िये, जंगली बिल्लियां, नीलगाय, चौसिंगा, चिंकारा और खरगोश शामिल हैं।यहां विभिन्न प्रकार के पक्षी पाए जाते हैं, जैसे कि मोर, बत्तख, बाज, उल्लू और तोते। यहां कुछ दुर्लभ और लुप्तप्राय पक्षी भी पाए जाते हैं, जैसे कि गिद्ध और सारस प्रमुख हैं।

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दोस्तों आशा करते हैं इस पोस्ट से आप राजस्थान के प्रमुख राष्ट्रीय उद्यानों से सम्बंधित महत्वपूर्ण तथ्यों को जान गए होंगे। अगर आप को हमारा यह लेख पसंद आया हो हमें कमेंट कर के जरूर बताएं और अपने दोस्तों के साथ शेयर करना न भूलें।  धन्यवाद।

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